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    कोरोना वायरस: लॉकडाउन में क्या बंद और क्या खुला रहेगा?

    सारांश:इमेज कॉपीरइट NARINDER NANU/AFP via Getty Imagesजनता कर्फ़्यू को गंभीरता से लेने पर प्रधानमंत्री नरें

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      जनता कर्फ़्यू को गंभीरता से लेने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लोगों की तारीफ़ की है.

      उन्होंने ट्वीट किया है कि 'देशवासियों ने बता दिया कि हम सक्षम हैं. लेकिन यह एक लंबी लड़ाई की शुरुआत है.'

      पीएम मोदी ने दो दिन पहले, 22 मार्च को एक दिवसीय कर्फ़्यू लगाने की घोषणा की थी.

      लेकिन इस 'लड़ाई' की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने रविवार शाम देश के 22 राज्यों के 75 ज़िलों में 31 मार्च तक के लॉकडाउन की घोषणा की है.

      आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त प्रेस वार्ता में बताया गया कि 'ये वो ज़िले हैं जहाँ कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने आये हैं.'

      इमेज कॉपीरइटRitesh Shukla/NurPhoto via Getty Imagesपरिस्थितियाँ बदल रही हैं...

      केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सह-सचिव लव अग्रवाल, जिन्होंने शनिवार को कहा था कि लॉक-डाउन का फ़िलहाल कोई प्लान नहीं है, उन्होंने रविवार को कहा कि 'जैसे-जैसे परिस्थितियाँ बदल रही हैं, हमें अपना रेस्पॉन्स बदलना होगा.'

      बीते चार दिनों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बड़ी तेज़ी से बढ़े हैं.

      भारत सरकार के अनुसार देश में क़रीब 350 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है और सात लोग इस संक्रमण से मारे गए हैं.

      क्या भारत में कोरोना वायरस की जाँच अब भी ज़रूरत से कम हो रही है?

      इस सवाल के जवाब में आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने रविवार को भी कहा कि 'ऐसा नहीं है.'

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      कोरोनावायरस से महामंदी की आहट'चेन ऑफ़ ट्रांसमिशन'

      एक ओर जहाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन कह रहा है कि 'कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए व्यापक स्तर पर जाँच होना ज़रूरी है.'

      वहीं भारत में कोविड-19 के टेस्टिंग प्रोटोकॉल बनाने वाली संस्था आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर बलराम भार्गव का कहना है कि 'हमें बेवजह जाँच नहीं करनी है, बल्कि हमें कैसे भी करके 'चेन ऑफ़ ट्रांसमिशन' को रोकना है और इसके लिए आइसोलेशन ही सबसे बढ़िया तरीक़ा है.'

      लॉकडाउन को बेहद ज़रूरी बताते हुए डॉक्टर भार्गव ने कहा, “अमरीका मौजूदा स्थिति में हर सप्ताह 26 हज़ार टेस्ट कर रहा है. हम हर हफ़्ते पाँच हज़ार टेस्ट कर रहे हैं. पंद्रह हज़ार लोगों का टेस्ट किया जा चुका है. हम हर सप्ताह 60 हज़ार लोगों को टेस्ट करने की क्षमता रखते हैं.”

      “पर इससे संक्रमण नहीं रुकेगा. संक्रमण रोकने के लिए हमें सोशल डिस्टेंसिंग करनी होगी, इसके लिए आइसोलेशन सबसे ज़रूरी है.”

      रविवार को भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि लॉकडाउन वाले 75 ज़िलों के अलावा अन्य ज़िलों में भी अगर कोरोना वायरस का संक्रमण मिलता है, तो लॉकडाउन का दायरा बढ़ाया जाएगा.

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      कोरोनावायरस: इटली में मौत का सन्नाटाक्या होता है लॉकडाउन?

      लॉकडाउन एक इमर्जेंसी व्यवस्था है जिसके तहत निजी प्रतिष्ठानों, निजी कार्यालयों एवं सार्वजनिक परिवहन को पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाता है.

      यानी लोगों के पास अपने घरों से निकलने की कोई ख़ास वजह होनी चाहिए.

      केंद्रीय मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में रविवार का बताया गया कि 'लॉकडाउन से लोगों को थोड़ी असुविधा ज़रूर होगी, लेकिन इसके पीछे जो नीयत है, उसे समझने की ज़रूरत है, यह सब अस्थाई है और महामारी से बचने के लिए इस तरीक़े को पूरी दुनिया अपना रही है.'

      यूँ तो राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक में शनिवार को ही प्रदेश के अधिकांश क्षेत्र में नियमित लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई थी.

      लेकिन रविवार शाम 22 राज्यों में आंशिक लॉकडाउन के आदेश आये.

      इसके तहत दिल्ली, केरल और बिहार सोमवार सुबह 6 बजे से पूरी तरह बंद किये जा रहे हैं.

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      .... जिन्हें है हाथ धोने की 'सनक'लॉकडाउन के दौरान क्या-क्या बंद रहेगा

      सार्वजनिक परिवहन बंद रहेगा. पर कुछ राज्यों ने कहा है कि 25% सरकारी बसें चलेंगी.

      सभी दुकानें, बड़े स्टोर, फ़ैक्ट्रियाँ, वर्कशॉप, दफ़्तर, गोदाम, साप्ताहिक बाज़ार बंद रहेंगे.

      अगर किसी ज़िले की सीमा दूसरे राज्य से मिलती है, तो उसे सील किया जाएगा. यानी बॉर्डर सील होंगे.

      एक राज्य से दूसरे राज्य को जोड़ने वाली बस और रेल सेवाएं रद्द कर दी जाएंगी. कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया जाएगा.

      सभी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम रद्द कर दिये जाएंगे. लोगों से अपील होगी कि वे घरों में ही रहें.

      और ये सारी कवायद लोगों को एक-दूसरे के संपर्क में आने से रोकने के लिए ही की जा रही है.

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      दूर-दूर रहें, कोरोना से बचेंलॉकडाउन में खुला क्या-क्या रहेगा

      भारत सरकार के अनुसार लॉकडाउन के दौरान पुलिस थाने, अस्पताल, अग्नि शमन विभाग, जेल, महत्वपूर्ण सरकारी दफ़्तर, खाद्यान एवं किराने की सरकारी दुकानें खुली रहेंगी.

      लॉकडाउन के दौरान जीवन के लिए आवश्यक चीजें लेने की अनुमति होती है. इसलिए कुछ सुविधाओं को इसकी परिधि से बाहर रखा जाता है.

      जैसे: बिजली-पानी, इंटरनेट, बैंकिंग एवं एटीएम की सुविधा जारी रहेगी. पोस्ट ऑफ़िस खुले रहेंगे. प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को काम करने दिया जाएगा.

      पेट्रोल पंप और सीएनजी या एलपीजी पंप खुले रहेंगे. दवाओं की दुकानें खुली रहेंगी. डेयरी एवं डेयरी से संबंधित प्रतिष्ठान खुले रहेंगे.

      किराना स्टोर से खाने-पीने का सामान ले सकेंगे. अधिकांश राज्य सरकारों आदेश दिया है कि जीवन के लिए ज़रूरी सामानों को अपने निकटतम स्थानों से ख़रीदें.

      साथ ही यह भी कहा गया है कि इन आदेशों की अवमानना करने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई होगी.

      अगर बहुत ज़रूरी हो तो लॉकडाउन में निजी वाहन का प्रयोग किया जा सकता है. हालांकि बिना वजह बाहर घूमने पर सरकार कार्रवाई कर सकती है.आपात स्थिति में एंबुलेंस को भी बुला सकते हैं.

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      कोरोनावायरस के टीके का इंतज़ारकिन देशों में है लॉकडाउन?

      चीन, डेनमार्क, अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, आयरलैंड, इटली, न्यूजीलैंड, पोलैंड और स्पेन में लॉकडाउन जैसी स्थिति है.

      चूंकि चीन में ही सबसे पहले कोरोना वायरस के संक्रमण का मामला सामने आया था, इसलिए सबसे पहले वहाँ लॉकडाउन किया गया.

      इटली में मामला गंभीर होने के बाद वहाँ के प्रधानमंत्री ने पूरे देश में आंशिक लॉकडाउन किया.

      लेकिन लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया जिसके बाद शनिवार को संक्रमण से प्रभावित कुछ इलाक़ों में फ़ौज को उतारना पड़ा.

      उसके बाद स्पेन और फ्रांस ने भी कोरोना संक्रमण रोकने के लिए यही क़दम उठाया है.

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