|

資訊

    首頁   >     行業    >     正文

    अनुच्छेद 370: मोदी सरकार के फ़ैसले पर क्या है जम्मू की राय

    摘要:इमेज कॉपीरइटBBC/Mohit KandhariImage captionपशु व्यापारी चौधरी यकीन मोहम्मदक्या जम्मू कश्मीर में अनुच

      इमेज कॉपीरइटBBC/Mohit KandhariImage caption

      पशु व्यापारी चौधरी यकीन मोहम्मद

      क्या जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर लोगों की राय बँटी हुई है?

      इस मुद्दे को लेकर उपजे तनाव का असर घाटी के अलावा जम्मू पर भी है. जम्मू के भीतर भी अनुच्छेद 370 पर लोगों के अलग-अलग मत हैं.

      एक ओर भाजपा नेता और कार्यकर्ता एक हफ़्ते से जश्न में डूबे हुए हैं. वहीं दूसरी ओर जम्मू शहर में कोई बड़ा जुलूस नहीं निकाला है. एक हफ़्ता बीत जाने के बाद भी कई लोग इस फ़ैसले को ठीक से पचा नहीं पा रहे हैं.

      नौकरियां जाने का डर

      टेलीफ़ोन काम न करने से ईद पर लोगों का अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं हो पा रहा. बाहर पढ़ने लिखने वाले बच्चे और कामकाजी लोग भी अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं.

      स्थानीय लोगों को इस बात की भी चिंता सता रही है कि आने वाले दिनों में अगर बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में व्यापारी आकर ज़मीन का सौदा करेंगे और सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करेंगे तो उनके हिस्से की नौकरी उन्हें कैसे मिलेगी?

      चिंता के ये स्वर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं तक भी पहुंच रहे हैं. उन्होंने पहले से यह कहना शुरू कर दिया है कि वो केंद्र सरकार के संज्ञान में यह बात लाएंगे कि यहाँ लोगों के हित सुरक्षित रखने के लिए सही दिशा में कदम उठाए जाएँ ताकि लोगों में नाराज़गी पैदा न हो जाए.

      ये भी पढ़ें

      कश्मीर पर अमरीका में भी समर्थन और विरोध के स्वर

      अनुच्छेद 370 को लेकर किए जा रहे दावों की पड़ताल

      इमेज कॉपीरइटBBC/Mohit KandhariImage caption

      किश्तवाड़ के रहने वाले अल्ताफ़ हुसैन कीन

      प्रदेश के बंटवारे का सवाल

      भाजपा के विभिन्न प्रकोष्ठों ने इस फ़ैसले पर खुशियाँ मनाई हैं. वेस्ट पाकिस्तानी रिफ़्यूजी परिवारों ने अपने स्तर पर कार्यक्रम किए हैं और वाल्मीकी समाज भी खुश है कि लगभग 70 साल की लड़ाई के बाद उन्हें उनके हक़ मिलेंगे.

      भतिंडी बाज़ार में मौजूद दंसाल निवासी पशु व्यापारी चौधरी यकीन मोहम्मद ने कहा, “इस बार बाज़ार का माहौल अच्छा नहीं है. अभी तक बाज़ार पूरी तरह से खुला भी नहीं हैं. पिछले हफ्ते बाज़ार बंद रहने की वजह से लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं.”

      उनका कहना था कि पिछले साल की तुलना में उन्हें अपने 'माल' का कम दाम मिल रहा है और बहुत नुक़सान उठाना पड़ रहा है.

      भतिंडी बाज़ार में अपने बेटों के साथ ख़रीदारी करने निकले जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के वकील मुश्ताक अहमद ने कहा, “अब भी लोगों के दिलों में डर बसा है, इसी की वजह से इस साल ईद के मौक़े पर बाज़ार थोड़ा ठंडा है.”

      मुश्ताक अहमद कहते हैं, “लंबे समय से जम्मू के लोग अनुच्छेद 370 को हटाए जाने की मांग को उठा रहे थे, लेकिन राज्य के दो टुकड़े कर उसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देना लोगों को रास नहीं आ रहा. इस फैसले से लोग यहां नाराज हैं.”

      इमेज कॉपीरइटBBC/Mohit KandhariImage caption

      अब्दुल सत्तार राथर

      रोज़गार के मौक़े बढ़ेंगे?

      जम्मू शहर के गुज्जर नगर इलाक़े में रहने वाले अब्दुल सत्तार राथर को लगता है कि इस फैसले के संबंध में कुछ लोग 'स्याह तस्वीर' पेश कर रहे हैं और कुछ 'गुलाबी तस्वीर' पेश कर रहे हैं.

      उन्हें लगता है कि इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान यहां के बेरोज़गार नौजवानों का होगा.

      उन्होंने कहा, “जिस राज्य की सीमा चीन और पाकिस्तान से सटी हो उसे दो हिस्सों में बांटना शायद ठीक नहीं था. इस से बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा क्योंकि हर छोटे बड़े फैसले के लिए मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल को दिल्ली में गृह मंत्री के दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ेंगे.”

      गुज्जर नगर में ही रहने वाले शफी मोहम्मद को सरकार के इस दावे पर भरोसा नहीं है कि विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म किए जाने से रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे.

      वो पूछते हैं कि अगर ऐसा है तो फिर ओडिशा, बिहार, झारखंड, गुजरात , मुंबई और अन्य राज्यों से मज़दूर जम्मू कश्मीर में मज़दूरी करने क्यों आते हैं?

      उन्होंने कहा, “लगभग सात लाख मज़दूर जम्मू कश्मीर में अपनी रोज़ी रोटी कमा रहे हैं. अब ये लोग हमे क्या अमीर बनाएंगे. ये तो हमे आने वाले समय में भीख मांगने पर भी मजबूर कर देंगे.”

      इमेज कॉपीरइटBBC/Mohit KandhariImage caption

      जम्मू में बकरीद पर बाज़ार तो सजे हैं पर ख़रीदारों में वैसा उत्साह नहीं दिख रहा

      तरीके को लेकर नाराज़गी

      शफ़ी मोहम्मद ने कहा कि राज्य में अगर किसी ने सबसे ज्यादा क़ुर्बानी दी है वो हैं कश्मीरी मुसलमान.

      वो कहते हैं, “हम भी हिंदुस्तानी हैं, हमने भी हिंदुस्तान के लिए कुर्बानी दी है. हमें हिंदुस्तान में ही रहना है. हमारे साथ फरेब नहीं करो. इस फ़ैसले से हमारे यहां भी उत्तर प्रदेश और बिहार की तरह अपराध में इजाफा होगा और कुछ नहीं.”

      किश्तवाड़ के रहने वाले अल्ताफ हुसैन कहते हैं, “भारत सरकार भले ही यहां तिरंगा झंडा लहराए, भले ही 'रियासत' का झंडा छीन ले लेकिन जम्मू कश्मीर के नौजवानों की नौकरियों का बंटवारा मत करो. हमारे यहां के नौजवान मुंबई, दिल्ली और बड़े-बड़े शहरों में रहने वाले बच्चों के साथ प्रतियोगिता नहीं कर सकते.”

      इमेज कॉपीरइटBBC/Mohit KandhariImage caption

      मोहम्मद यूनिस मन्हास

      मोहम्मद यूनिस मन्हास कहते हैं कि वो हिंदुस्तान के साथ रहना चाहते हैं और प्रधानमंत्री का 'हर हुक्म मानने को तैयार' हैं लेकिन जिस तरह से हमें घरों में बंद करके और बिना हमारी राय जाने इस फैसले को लागू किया गया,उसकी वजह से लोगों में गुस्सा है.

      भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना की मौजूदगी में पार्टी से जुड़े गुर्जर समुदाय के लोगों ने शनिवार को जश्न मनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार भी जताया था.

      इमेज कॉपीरइटBBC/Mohit Kandhariबीजेपी खुश, विरोध में कांग्रेस

      उन्होंने गुर्जर,बकरवाल समुदाय के लोगों की तरफ से अनुच्छेद 370 हटने के पक्ष में जश्न मनाए जाने की सराहना भी की थी.

      उन्होंने कहा, “अभी तक नेशनल कांफ्रेंस,कांग्रेस और पीडीपी उनके समुदाय के लोगों को केवल वोट बैंक के रूप में प्रयोग करते रहे.” उन्होंने ये भी कहा कि अनुच्छेद 370 हटने से वन अधिकार अधिनियम जम्मू कश्मीर में भी लागू हुआ है.

      अभी तक यह लाभ जम्मू कश्मीर के लोगों को नहीं मिलता था. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में केवल अब्दुल्लाह, मुफ्ती और नेहरू परिवारों ने ही दशकों तक शासन किया है, लेकिन 370 हटने के बाद अब सब कुछ बदल गया है.

      उधर स्थानीय कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार के फ़ैसले से लोग ख़ुश नहीं हैं.

      कांग्रेस नेता रविंदर शर्मा कहते हैं कि जम्मू संभाग के राजौरी, पुंछ, डोडा और किश्तवाड़ में बड़ी संख्या में रहने वाले वाले लोग धारा 370 को हटाए जाने के ख़िलाफ़ थे और वो इस फ़ैसले से खुश नहीं हैं. उनके मुताबिक ऐसे भी लोग हैं जो कहते हैं कि कम से कम प्रदेश को दो हिस्सों में नहीं बांटा जाना चाहिए था.

      कश्मीर पर मुस्लिम देशों से भी पाकिस्तान को निराशा?

      पाकिस्तान व्यापारिक रिश्ता तोड़ अपना ही कर रहा नुक़सान

      (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिककर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

    熱點資訊

    United Arab Emirates Dirham

    • United Arab Emirates Dirham
    • Australia Dollar
    • Canadian Dollar
    • Swiss Franc
    • Chinese Yuan
    • Danish Krone
    • Euro
    • British Pound
    • Hong Kong Dollar
    • Hungarian Forint
    • Japanese Yen
    • South Korean Won
    • Mexican Peso
    • Malaysian Ringgit
    • Norwegian Krone
    • New Zealand Dollar
    • Polish Zloty
    • Russian Ruble
    • Saudi Arabian Riyal
    • Swedish Krona
    • Singapore Dollar
    • Thai Baht
    • Turkish Lira
    • United States Dollar
    • South African Rand

    United States Dollar

    • United Arab Emirates Dirham
    • Australia Dollar
    • Canadian Dollar
    • Swiss Franc
    • Chinese Yuan
    • Danish Krone
    • Euro
    • British Pound
    • Hong Kong Dollar
    • Hungarian Forint
    • Japanese Yen
    • South Korean Won
    • Mexican Peso
    • Malaysian Ringgit
    • Norwegian Krone
    • New Zealand Dollar
    • Polish Zloty
    • Russian Ruble
    • Saudi Arabian Riyal
    • Swedish Krona
    • Singapore Dollar
    • Thai Baht
    • Turkish Lira
    • United States Dollar
    • South African Rand
    當前匯率  :
    --
    請輸入金額
    United Arab Emirates Dirham
    可兌換金額
    -- United States Dollar
    風險提示

    外匯天眼資料均來自各國外匯監管機構的官方資料,如英國FCA、澳大利亞ASIC等,所公佈的內容亦均以公正、客觀和實事求是為宗旨,不向外匯交易平臺收取公關費、廣告費、排名費、資料清洗費等灰色費用。外匯天眼會盡最大努力保持我方資料與各監管機構等權威資料方資料的一致及同步性,但不承諾與其即時保持一致和同步。

    鑒於外匯行業的錯綜複雜,不排除有個別外匯交易商通過欺騙手段獲得監管機構的合法註冊。如外匯天眼所公佈資料與實際情況有不符之處,請通過外匯天眼“投訴”和“糾正”功能,向我們提出,我們將及時進行核實查證,並公佈相關結果。

    外匯、貴金屬和差價合約(OTC場外交易)是槓桿產品,存在較高的風險,可能會導致虧損您的投資本金,請理性投資。

    特別提示,外匯天眼所列資訊僅供參考,不構成投資建議。外匯平臺由客戶自行選擇,平臺操作帶來的風險,與外匯天眼無關,客戶需自行承擔相關後果和責任。

    ×

    選擇國家/地區